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जानिये कैसे लोगो ने crypto currency में 100 रूपए से कमाए 2 करोड़

आज कल हर तरफ ये कुछ नाम, बिट कॉइन (Bit coin ) और crypto करेंसी आपको सुनने के लिए मिल रहे होंगे, अगर आप भी उन लोगो में से  हैं जो सुन तो हर जगह रहे हैं क्रिप्टो कर्रेंसी के बारे में लेकिन आपको इसके बारे में कुछ  ख़ास पता नहीं है तो चिंता मत कीजिये इस ब्लॉग में आपको क्रिप्टोकरेंसी क्या है सब कुछ विस्तार से समझायेंगे बस आप इस लेख को अंत तक पढ़िए और हमारा दावा है की इसके बाद आपके मन में कोई भी सवाल नहीं होगा इस टॉपिक से जुड़ा हुआ, जिसका जवाब आपको न मिला हो। 

आइये शुरू करते हैं और सबसे पहले जान लेते हैं की ये क्रिप्टोकरेंसी क्या है

क्या होती है क्रिप्टो करेंसी ?

क्रिप्टोकरेंसी क्या है क्रिप्टो करेंसी एक प्राइवेट नेटवर्क की बनायीं हुयी डिजिटल करेंसी है ।

क्या होती है डिजिटल करेंसी ?

इसे आप एक उदहारण से समझिये।  मान लीजिये की सुरेश और रमेश नाम के दो बिजनेसमैन हैं जो साथ में बिज़नेस करते हैं।

एक दिन सुरेश ने रमेश के लिए 1000 रूपए का काम किया तो रमेश ने सुरेश को 1000 देने की बजाय उसे एक 1000 रूपए का चांदी का सिक्का दे दिया और फिर अगली बार जब जब दोनों एक दुसरे के लिए जितना काम करते उतने ही चांदी के सिक्को का लें दें दोनों करने लगे जैसे एक लाख की कोई डील हुयी तो 100 चांदी के सिक्को का लेन देन हुआ जिनकी कीमत एक लाख ही थी।

जब समय आगे बढ़ा तो दोनों के शहर अलग हो गए, बिज़नेस अभी भी चल रहा था तो दोनों ने चांदी के सिक्को को ऑनलाइन कर दिया बस इसी सिक्को के ऑनलाइन लेन देन को कहते हैं डिजिटल डीलिंग और ये ऑनलाइन वैल्यू वाले सिक्के कहलाते हैं डिजिटल कोइन्स।

कैसे होता है लेन देन का हिसाब?

अब ये सवाल आपके भी मन में आरहा होगा की जब लेन देन ऑनलइन होता है तो इस पूरे लेन देन का हिसाब कैसे रखा जाता है ? तो इसका जवाब है लेजर (ledger ) ये लेजर एक ऑनलाइन अकाउंट सिस्टम जैसा होता है जो इस पूरे लेन देन का हिसाब रखता है।

चोरी और धोखाधड़ी से कैसे बचा जा सकता है ?

अगला सवाल ज़ाहिर सी बात है यही आता है की यदि एक व्यक्ति इस पूरे अकाउंट का लेखा जोखा देख रहा है तो फिर तो वो धोखाधड़ी भी कर ही सकता है ?

लेकिन ऐसा ना हो इसीलिए क्रिप्टो करेंसी के मैनेजमेंट को multiple ledgers से मैनेज किया जाता है यानि चोरी तब हो सकती है जब पैसे के लेन देन का पूरा हिसाब बस एक आदमी या एक कंप्यूटर पर हो लेकिन यदि वही हिसाब ऑनलाइन हज़ारो लोगो के पास होता है तो जैसे ही एक आदमी चोरी करेगा वो पकड़ा जायेगा इसीलिए सेफ होती है crypto करेंसी ।

क्या होता है peer to Peer नेटवर्क ?

क्रिप्टो करेंसी में धोखाधड़ी को रोकने के लिए सभी ट्रांसक्शन्स का रिकॉर्ड एक नहीं बल्कि कई सारे लोगो के पास होता है और उसी नेटवर्क को कहते हैं Peer to Peer नेटवर्क । और ये Peer to Peer नेटवर्क ठीक से काम करे उसके लिए बनाया गया है एक कमाल का टेक्नोलॉजी जिसे कहते हैं block chain ।

क्या होता है ब्लॉक chain ?

बस यूँ समझ लीजिये की एक मालगाड़ी में आगे तो इंजिन होता है लेकिन उसके पीछे जो डब्बे लगे होते हैं उन्हें कहते हैं ब्लॉक जब एक डब्बा भर जाता है तो बाकि का सामान दुसरे डब्बे में रक्खा जाता है और ऐसे ही डब्बो की chain को कहते हैं ब्लॉक chain जिनमें इनफार्मेशन होती है और जैसे जैसे ब्लॉक्स भरते जाते हैं नए ब्लॉक जुड़ते जाते हैं ।

क्या है Bit Coin ?

ये बिट कॉइन (Bit coin ) बस यूँ समझ लीजिए की क्रिप्टो करेंसी का सिर्फ एक प्रकार है ऐसी और भी कई नाम से करेंसी या कोइन्स आते हैं लेकिन बिट कॉइन इनमें सबसे ज़्यादा पॉपुलर है ।

कैसे बन गए लोग बिट कॉइन से करोड़पति ?

जब साल 2010 में बिट कॉइन लांच हुआ था तो उसकी कीमत थी मात्र 20 रूपए  , लेकिन कुछ साल पहले तक ये 20 रूपए का बिट कॉइन 45 लाख का हो गया था , और आज भी इसकी कीमत करीब 30 लाख रूपए है यानि जिन लोगो ने बिट कॉइन में 2010 में 100 रूपए इन्वेस्ट किये थे उन्होंने इससे कुछ समय पहले 2 करोड़ या उससे भी ज़्यादा  कमाए थे यही कारण है की बिटकॉइन ने इन्वेस्टमेंट के सरे रिकार्ड्स तोड़ दिए । लेकिन अंत में ये ध्यान रखें की इस तरह का निवेश खतरों से भरा होता है ।

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